Beti Bachao Beti Padhao In Hindi – भारत एक ऐसा देश हैं। जहाँ नारी और गाय को बहुत ज्यादा आदर भाव दिया जाता हैं। नारी को यहाँ देवी का सवरूप माना जाता हैं और वे होती भी हैं। प्राचीन काल से भी हमारे भारत में महिलाओं को देवियों का दर्जा प्रदान।

आज मैं इस पोस्ट में आपके लिए इसी विषय यानी बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ ( Beti Bachao Beti Padhao ) पर निबंध लेकर आया हूँ। तो चलिए निबंध की शुरुवात करते हैं। सबसे पहले आपको बता दी यहाँ पहले बेटी बचाओ बेटी बढ़ाओ पर पहले विस्तार निबंध लिख रहा हूँ। अगर आपको संक्षिप्त में निबंध चाहिए तो सबसे निचे पढ़े और इसके लिए विषय सूचि ( Table Of Content ) देखें।

Essay On Beti Bachao Beti Padhao In Hindi | बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध |

भूमिका – आज हमलोग चाँद तक चले गए हैं। हमलोग 21 वीं सदी में जी रहे हैं। पुरुष ही नहीं औरते भी चाँद तक चली गयीं हैं। कल्पना चावला के बारे में आप जानते ही होंगे। इतना विकास होने के बाद भी भारत की बेटियां अपने ही घर से निकलने में कतरा रहीं हैं। जिस से यह साबित होता है की भारत आज भी एक पुरुष प्रधान देश हैं।

स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था की जिस देश में महिलाओं का सामान नहीं होता है। वह देश प्रगति नहीं कर सकती हैं। हमारे देश के लोगों की मानसिकता इतनी ख़राब हो चुकी हैं की महिलाओं और बेटियों का लोग सामान ही नहीं करते हैं आज कल।

लोग बेटे और बेटियों में फर्क करने लगे हैं। वहीँ माँ लंच बॉक्स में बेटियों के लिए खाना में अच्छा नहीं पैक करती हैं जबकि अपने बेटो के लिए अच्छा खाना पैक करती हैं। बेटों को प्राइवेट स्कूल और कॉलेज में भेजा जा रहा है जबकि बेटियों को सरकारी स्कूल और कॉलेज में। उन्हें किसी भी प्रकार की आजादी नहीं दी जाती है।

जिसके कारण बेटियों का भविष्य अंधकार में चला गया है। हमारे देश की बेटियां आज घर से निकलने पर भी कतराते हैं क्योंकि कुछ लोगों ने देश का माहौल इतना खराब कर दिया है कि आए दिन हम देखते हैं कि किसी ने किसी की बहन बेटी से बलात्कार की या छेड़छाड़ की घटनाएं सामने आती रहती हैं।

हमारे देश में दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही कन्या भ्रूण हत्या भी लोगों की मानसिकता का परिचय देती है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने भारत को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर कन्या भ्रूण हत्या जैसे मामलों पर जल्द ही कोई संज्ञान नहीं लिया गया तो जनसंख्या से जुड़े संकट उत्पन्न हो सकते हैं।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना क्या हैं ? Beti Bachao Beti Padhao Yojana Kya Hai ?

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का संक्षिप्त नाम BBBP भी हैं। यह महिला एवं बाल विकाश मंत्रालय , स्वास्थ्य मत्रालय और परिवार कल्याण मंत्रालय एवं मानव संसाधन विकास की एक सयुक्त पहल हैं। इस योजना में बेटीओं को बढ़ाने लिखाने पर बल दिया गया हैं।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ स्लोगन | Beti Bachao Beti Padhao Slogan |

  • बेटा – बेटी दोनों एक समान, यह तो है आपकी शान |
  • जब – जब खड़ी उठी है नारी, हर किसी पर पड़ी है भारी।
  • जब घर में संकट आते है, तब बेटियां ही उससे बचाते है।
  • बेटी नहीं है किसी से कम, मिटा दो अपने सारे भ्रम।
  • हर घर में अब आवाज उठेगी, बेटियां भी अब आगे बढेंगी।
  • अब न बनाओ कोई नया किस्सा, बेटियों को दो अब समाज में हिस्सा।
  • बेटी है तो कल है।
  • जैसे करते हो खुद की रक्षा, ऐसे ही करो बेटी की सुरक्षा।
  • अश्लीलता को दूर भगाओ, अपनी बेटियों को बचाओ।
  • हर बेटी की यही पुकार, हमारे जीवन में अब करो सुधार।
  • समाज तभी आगे बढेगा, जब बेटियों को सम्मान मिलेगा।
  • लड़का पढ़े तो अकेला बढ़े, लड़की पढ़े तो दो परिवार आगे बढ़े।
  • बेटी बचाओ, बेटी बढ़ाओ।
  • बेटी बचाओ अपना देश बढ़ाओ।
  • असंभव को संभव बनाओ, अपनी बेटी को आगे बढाओ।
  • बेटी होती है देश की शान, इससे मिलती है आपको पहचान।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत |

इस अभियान की शुरुवात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2015 में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ नाम की योजना का प्रारंभ किया। इसका उद्घाटन हरियाणा राज्य के पानीपत जिला में किया गया था। इसके साथ ही प्रधानमंत्री जी ने बेटियों का महत्व भी बताया, उन्होंने कहा कि अगर बेटियां पढ़ी-लिखी नहीं होंगी तो पूरा परिवार ही अनपढ़ रह जाएगा। जिसके कारण हमारा भारत देश विकास विकासशील देश ही बनकर रह जाएगा कभी भी विकसित नहीं हो पाएगा।

उन्होंने इस योजना के माध्यम से इस बात पर जोर दिया कि बेटियों के साथ जो भी भेदभाव हो रहे हैं उनको खत्म किया जाए और साथ ही उनको पढ़ने लिखने की भी आजादी दी जाए। बेटियों को भी अपना जीवन जीने का पूर्ण अधिकार होना चाहिए।

हरियाणा में 1000 लड़कों पर सिर्फ 775 लड़किया ही थी। जिसके कारन यहाँ लिंग अनुपात की समस्या हो रही थी। इस योजना की शुरुवात देश के 100 उन जिलों में किया गया है जहाँ लिंग अनुपात गड़बड़ाया हुआ हैं।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का उद्देश्य | Purpose of Beti Bachao Beti Padhao Movement in Hindi |

  1. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत सामाजिक व्यवस्था में बेटियों के प्रति रूढ़िवादी मानसिकता को बदलना।
  2. बालिकाओं की शिक्षा को आगे बढ़ाना।
  3. भेदभाव पूर्ण लिंग चुनाव की प्रक्रिया का उन्मूलन कर गांव का अस्तित्व और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  4. घर-घर में बालिकाओं की शिक्षा को सुनिश्चित करना।
  5. लिंग आधारित भ्रूणहत्या की रोकथाम।
  6. लड़कियों की शिक्षा और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना।

लड़कियों की दुर्दशा कैसे सुधरेगी ?

लिंग जांच को रोकना – वर्तमान में नई तकनीकों के विकास के कारण गर्भ में ही पता लगा लिया जाता है कि बच्चा लड़का पैदा होगा या लड़की तो लोग इसका फायदा उठा कर पहले ही पता लगा लेते हैं कि उन्हें लड़का पैदा होगा या फिर लड़की अगर उन्हें पता चलता है कि लड़की पैदा होने वाली है तो वे लड़की की गर्भ में ही हत्या करवा देते हैं जिसके कारण लड़कियों का लिंगानुपात निरंतर कम होता जा रहा है। [ Beti Bachao Beti Padhao in Hindi ]

भारत में लिंग जांच करने वाली मशीनें आसानी से मिल जाती हैं इन मशीनों पर हमें तुरंत रोक लगानी चाहिए। हालांकि भारत सरकार ने इसके ऊपर एक सख्त कानून लाया है लेकिन कुछ लालची डॉक्टरों के कारण आज भी लिंग जांच होती है और लड़कियों की गर्भ में हत्या कर दी जाती है।

2. स्त्री शिक्षा को बढ़ावा देना – हमें स्त्री शिक्षा को बढ़ावा देना चाहिए, अगर समाज में शिक्षित महिलाएं होंगी तो वह कभी भी अपने गर्भ में पल रही बेटियों की हत्या नहीं होने देगी। उनकी हत्या का मुख्य कारण यह है कि महिलाओं को शिक्षा के बारे में कुछ पता नहीं होता है और उन्हें पुरानी रूढ़िवादी बातों में फंसा कर उनके परिवार वाले अपनी ही बेटी कि गर्भ में हत्या करवा देते हैं। इसलिए जितना स्त्री शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा उतना ही लड़कियों का लिंगानुपात बढ़ेगा।

3. लड़कियों के प्रति भेदभाव को रोकना – हमारे 21वीं सदी के भारत में जहां एक और कल्पना चावला जैसी महिलाएं अंतरिक्ष में जा रही हैं वहीं दूसरी ओर हमारे समाज के लोग लड़कियों से भेदभाव कर रहे हैं। लड़कियों से लिंग चयन के आधार पर भेदभाव किया जाता है और अगर उनका जन्म हो भी जाता है तो उनको उचित शिक्षा नहीं दी जाती है

उनका उचित पालन पोषण नहीं किया जाता है इस भेदभाव नीति के कारण लड़कियों का विकास सही से नहीं हो पाता है और वे पिछड़ी हुई रह जाती है जिसके कारण वह लड़कों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर नहीं चल पाती हैं। हालांकि वर्तमान में शहरों में लड़कियों की स्थिति में कुछ बदलाव आया है। लेकिन इतना भी बदलाव नहीं आया है कि कहां जा सके कि लड़कियों के साथ भेदभाव नहीं हो रहा है।

4. लोगों की मानसिकता बदलना – हमारे 21वी सदी के भारत में एक और तो लोग अपने सभ्य होने का दावा करते हैं और दूसरी ओर वह महिलाओं का शोषण करते हैं उनसे छेड़छाड़ करते हैं और बलात्कार जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं। यह लोग कोई और नहीं हम में से ही कुछ ऐसे लोग हैं जिनकी मानसिकता इतनी खराब हो चुकी है कि वह महिलाओं को एक वस्तु के समान भोग विलास की वस्तु मानते हैं।

ऐसे लोगों को समाज से बाहर कर देना चाहिए, यह लोग समाज के लिए ही नहीं पूरे विश्व के लिए बहुत ही खतरनाक हैं। इसलिए इन जैसी सोच रखने वाले लोगों की मानसिकता में बदलाव लाना बहुत जरूरी हो गया है क्योंकि दिन प्रतिदिन ऐसे लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है जिसका परिणाम आप आए दिन अखबारों और समाचारों में देखते रहते हैं।

5. लड़कियों की सुरक्षा के प्रति सख्त कानून का निर्माण करना – भारत सरकार को लड़कियों की सुरक्षा के लिए सख्त कानूनों का निर्माण करना चाहिए जिससे कि किसी की हिम्मत ना हो लड़कियों से शोषण करने की ओर उनसे भेदभाव करने की। हालांकि सरकार ने कुछ ऐसे कानून बनाए हुए हैं जिनसे महिलाओं की सुरक्षा की जा सकती है लेकिन इन कानूनों में कुछ कमियां होने के कारण लोग इसका फायदा उठाते हैं और बलात्कार जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं।

हाल ही में सरकार ने एक नया कानून लाया है जिसकी सराहना की जा सकती है जिसमें 12 साल तक की लड़कियों से बलात्कार करने पर फांसी की सजा दी जाएगी। अगर ऐसे ही सख्त कानून बनते रहे तो किसी की भी हिम्मत नहीं होगी कि लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार करें।

उपसंहार | Beti Bachao Beti Padhao in Hindi |

सब कुछ पढ़ने के बाद मैं यहीं कहना चाहूंगा की बेटी भी बेटो से काम नहीं होती हैं। उनका मौलिक अधिकार उन्हें देना चाहिए। हमें लड़के और लड़कियों में भेदभाव नहीं करना चाहिए। अगर बेटी ही नहीं होगी तो यह संसार चलना मुश्किल हो जायेगा।

Beti Bachao Beti Padhao In Hindi | Short Essay For Class 5 , 6 , 7 , 8 , 9 , 10

प्रस्तावना – हम सभी जानते हैं कि हमारा भारत देश एक कृषि प्रधान देश है और पुरुष-प्रधान देश है। यहाँ सदियों से स्त्रियों के साथ ज्यादतियां होते आई है। जब ईश्वर होकर माता सीता इस कुप्रथा से नहीं बच पायी, फिर हम तो मामूली इंसान है, हमारी क्या औकात।
ये पुरुष-प्रधान समाज लड़कियों को जीने नहीं देना चाहता। मुझे समझ नही आता, मैं इन मर्दो की सोच पर हंसु या क्रोधित होऊं। ये जानते हुए भी कि उनका अस्तित्व भी एक महिला के कारण ही है,
फिर भी ये पुरुष समाज केवल पुत्र की ही कामना करता है। और अपने इस पागल-पन में न जाने कितनी लड़कियों का जीवन नष्ट किया है।
देश में लगातार घटती कन्या शिशु-दर को संतुलित करने के लिए इस योजना की शुरुआत की गयी। किसी भी देश के लिए मानवीय संसाधन के रुप में स्त्री और पुरुष दोनों एक समान रुप से महत्वपूर्ण होते है।
केवल लड़का पाने की इच्छा ने देश में ऐसी स्थिति उत्पन्न कर दी है, कि इस तरह के योजना को चलाने की जरुरत आन पड़ी। यह अत्यंत शर्मनाक है।
यद्यपि स्त्रियों के साथ भेदभाव समूल विश्व में होता है। यह कुछ नया नहीं है। आज भी समान कार्य के लिए लड़कियों को अपेक्षाकृत कम वेतन दिए जाते है। कहीं अधिक काबिल होने के बाद भी।
लड़कियों के साथ शोषण होने के पीछे मुख्य कारण अशिक्षा भी है। अगर हम पढ़े-लिखे शिक्षित होते हैं तो हमें सही-गलत का ज्ञान होता है। जब बेटियां अपने पैर पर खड़ी होंगी तो कोई भी उन्हें बोझ नहीं समझेगा।
इसीलिए ‘बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम’ के माध्यम से बेटियों को अधिक से अधिक शिक्षित बनाने पर जोर दिया जा रहा है। शिक्षित लोगों के साथ कुछ भी गलत करना आसान नहीं होता।
लड़की पढ़ी-लिखी होगी तो न अपने साथ कुछ गलत होने देगी और न ही किसी और के साथ होते देखेगी। इसीलिए लड़की का शिक्षित होना अत्यंत आवश्यक है।

Conclusion |

दोस्तों यह निबंध आपको कैसे लगा मुझे कमेंट के माध्यम से बताइये। अगर आप और भी निबंध पढ़ना चाहते हैं तो यह पढ़िए।